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क्यों बेनज़ीर का मुस्कुराना मंजूर नहीं था

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भारत-पाक विभाजन के साथ ही कभी एक ही राष्ट्र के रहनुमा रहे लोगों को शांतिपूर्वक जीवन जीने के लिए एक-दूसरे के साथ कई समझौते करने पड़े. इन समझौतों में से एक था शिमला समझौता, जिसके लिए भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधि के तौर पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी शामिल हुई थीं. इस समझौते को 41 साल पूरे हो चुके हैं और इस मौके पर इस समझौते से जुड़ी एक खास बात हम आपको बताने जा रहे हैं. जब पाकिस्तान की पहली महिला राजनेत्री बेनजीर भुट्टो ने भारत में कदम रखा था तब वह मात्र 19 साल की थीं.



हर हसीना को देखकर उसका दिल मचल उठता था



पहले जुल्फिकार अली भुट्टो अपनी इस यात्रा के लिए अपनी पत्नी को साथ लेकर आना चाहते थे लेकिन पत्नी की तबियत खराब होने की वजह से वह जुल्फिकार अली भुट्टो के साथ नहीं जा पाईं इसीलिए उन्होंने बेनजीर को ही अपने साथ ले लिया. वैसे जिस तरह कोई आम पिता अपनी बेटी को विभिन्न निर्देशों के तहत किसी दूसरी जगह लेकर जाता है वैसे ही बेनजीर के पिता ने भी बेनजीर को कई निर्देश दिए थे. फर्क बस इतना था कि उन निर्देशों का मतलब भारत की आवाम तक कुछ संदेश पहुंचाना था.



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अपनी आत्मकथा ‘डॉटर ऑफ द ईस्ट’ में बेनजीर भुट्टो ने यह साफ लिखा है कि उनके पिता यानि पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने उन्हें शिमला समझौते के लिए भारत आने से पहले यह कहा था कि वहां उन्हें ज्यादा मुस्कुराना नहीं है. क्योंकि अगर बेनजीर भारतीय आवाम के सामने मुस्कुराएंगी तो कहीं भारतीय सरकार यह ना सोचने लगे कि भारत में पाकिस्तान के 83,000 युद्धबंदियों के होने के बावजूद पाकिस्तानी सरकार खुश है. इतना ही नहीं बेनजीर भुट्टो को यह भी आदेश था कि वह उदास भी नजर नहीं आनी चाहिए ताकि भारतीय जनता उन्हें हारा हुआ और कमजोर ना समझ ले.



इस पर बेनजीर भुट्टो ने उनसे पूछ ही लिया कि उन्हें हंसना नहीं है, उदास नहीं होना तो फिर उन्हें करना क्या है. इस पर जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा तुम्हें कोई भाव अपने चेहरे पर नहीं लाने बिल्कुल शांत रहना है. इस पर बेनजीर ने कहा कि उनसे ऐसा कुछ नहीं होगा, यह काम बहुत मुश्किल है.


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उम्र ढलने के बावजूद भुट्टो बहुत खूबसूरत थीं लेकिन जब वह अपनी युवावस्था में थीं तो उनकी खूबसूरती से भारतीय भी बच नहीं पाए थे. पाकिस्तान की यह युवा लड़की जब पहली बार भारत आई थी तब शायद उसे यह अंदाजा नहीं था कि उसकी खूबसूरती भारत में उन्हें इतनी जल्दी लोकप्रिय कर देगी. अपनी भारत यात्रा के दौरान वह जहां भी जातीं लोग उन्हें देखते और उनकी शालीनता की तारीफ करते थे.



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