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अगर चूँ की तो गयी जान, क्या है सेना में इस तस्वीर के पीछे की हकीकत

Posted On: 3 Sep, 2015 Others में

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इन तस्वीरों को देखकर चौंकिये नहीं! ये तस्वीरें उस देश के सैनिकों की है जिसके पास विश्व की सबसे बड़ी सेना है. सेना अनुशासन का पर्याय मानी जाती है. विश्व का हर वो देश जो अपने भूभाग की तथाकथित रक्षा और उसके विस्तार के लिये सेना रखता है, उनमें अनुशासन बनाये रखने का हर सम्भव प्रयास वहाँ की राजसत्ता करती है. चूँकि नेताओं को उनसे विद्रोह का ख़तरा हमेशा बना रहता है इसलिये उसमें कठोर अनुशासन की जरूरत पर बल दिया जाता रहा है.


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इस कठोर अनुशासन को बनाये रखने के लिये तमाम तरह के नियम बनाये जाते हैं. ये नियम देश, सेना और पद के आधार पर अलग-अलग होते हैं. लेकिन चीन की पीपल पैरामिलिट्री पुलिस का सैनिकों में अनुशासन बनाये रखने के लिये अपनाये जाने वाला यह तरीक़ा अमानवीय तो कहा ही जा सकता है.


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पीपल पैरामिलिट्री पुलिस के इन सैनिकों की वर्दी के कॉलर में पिन लगाये जाते हैं. इन पिनों को इस तरह से लगाया जाता है कि सैनिक सावधान की मुद्रा में खड़े रहें. अगर किसी सैनिक का इस मुद्रा से तनिक भी विचलन होता है तो वर्दी की कॉलर में लगा पिन उसकी गर्दन में चुभ जाता है. इस चुभन के कारण वो वापस सावधान की मुद्रा में खड़ा हो जाता है.


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इसे वर्दी की कॉलर में लगाने के पीछे ये उद्देश्य रहता है कि जब-जब सैनिक सावधान की मुद्रा से थक आराम पाने की चाहत में शरीर के अंगों की अवस्थिति को बदलेगा उसे सुई की चुभन महसूस होगी जिससे वो वापस अपने अंगों को उसी अवस्था में ले आयेगा. इतना ही नहीं अंग-विन्यास को सही रखने के लिये उनकी पीठ पर क्रॉस लटकाया जाता है.


भले ही अनुशासन के अनुपालन के नाम पर किसी भी देश में इस तरह के नियम प्रचलन में हों लेकिन मानवीय दृष्टिकोण से इसे यथोचित नहीं कहा जा सकता. वैश्विक मानव समुदाय इक्कसवीं शताब्दी में होने का ढ़िंढ़ोरा पीट ख़ुशफ़हमी पालने के लिये स्वतंत्र है लेकिन इस तरह के नियम वास्तविक हक़ीकत को शब्द देने के लिये पर्याप्त हैं. रामधारी सिंह दिनकर के कुरूक्षेत्र की ये पंक्तियाँ इन्हीं भावों से जुड़ी है:-Next….


ईश जानें, देश का लज्जा विषय

तत्व है कोई कि केवल आवरण

उस हलाहल-सी कुटिल द्रोहाग्नि का

जो कि जलती आ रही चिरकाल से

स्वार्थ-लोलुप सभ्यता के अग्रणी

नायकों के पेट में जठराग्नि-सी।


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